थाइलैंड से गोरखपुर तक – गरीबों के मसीहा बने राम अशीष यादव ‘पड़वा वाले’, मानवता की मिसाल पेश कर रचा अनोखा इतिहास

थाइलैंड से गोरखपुर तक – गरीबों के मसीहा बने राम अशीष यादव ‘पड़वा वाले’, मानवता की मिसाल पेश कर रचा अनोखा इतिहास
  • नरसिंह यादव, क्राइम रिपोर्टर – गोरखपुर (उत्तर प्रदेश)
  • कैमरामैन – कौस्तुभ तिवारी

गोरखपुर जनपद के दक्षिणांचल के बड़हलगंज कोतवाली क्षेत्र के मरवटिया पिड़हनी गांव के रहने वाले राम अशीष यादव, जो आजकल थाइलैंड के बैंकॉक में रहते हैं, वहां भले ही व्यवस्थित जीवन बिता रहे हों — खेती-बाड़ी, दुकान, मकान और गाड़ी सब कुछ हो — लेकिन उनका दिल अब भी अपने गांव और यहां के लोगों के लिए धड़कता है। सरल स्वभाव, उदार हृदय और परोपकार की भावना से लबरेज़, राम अशीष यादव को लोग प्यार से “पड़वा वाले” कहते हैं, क्योंकि उनके पास एक विशेष भैंसा (पड़वा) है जो थाइलैंड में भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहता है।

थाइलैंड में भी जिंदा है गांव का प्यार

थाइलैंड में रहते हुए भी वे अपने गांव और आसपास के लोगों से जुड़ाव नहीं भूलते। बीते नागपंचमी पर उन्होंने वहां एक कार्यक्रम में अपने प्रिय पड़वा को भी साथ लेकर शिरकत की, जो स्थानीय चर्चा का विषय बन गया। यह सिर्फ पशु-प्रेम ही नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी और परंपरा के प्रति गहरे लगाव का प्रतीक है।

शिक्षा की राह आसान करने का सराहनीय कार्य

राम अशीष यादव के परोपकार के किस्से गोरखपुर में अब मिसाल बन चुके हैं। हाल ही में, उन्होंने ग्राम सभा अतायर की 8वीं कक्षा की छात्रा सुप्रिया गुप्ता को नई साइकिल भेंट की। सुप्रिया के पिता स्व. टुन टुन गुप्ता का निधन हो चुका है और घर की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। अब यह साइकिल सुप्रिया की पढ़ाई की राह आसान कर देगी, ताकि वह चार-पांच किलोमीटर दूर स्कूल तक आसानी से पहुंच सके।

विधवा के लिए ‘घर’ का सपना हुआ सच

राम अशीष यादव का दान सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं है। बेलीपार थाना क्षेत्र के ग्राम भस्मा की विमला देवी, जो लगभग दस साल से विधवा हैं और जिनका इकलौता बेटा मानसिक रूप से कमजोर है, खुले आसमान के नीचे जिंदगी बिता रही थीं। बारिश हो या ठंड, मां-बेटे का सहारा बस दूसरों की दया थी। सरकारी तंत्र की उदासीनता के बीच, राम अशीष यादव ने आगे बढ़कर लगभग 80,000 रुपये का निर्माण सामग्री — ईंट, बालू, गिट्टी और सीमेंट — भिजवाकर उनके घर के निर्माण की शुरुआत करवाई। अब बरसों पुराना उनका सपना सच होने जा रहा है।

गरीबों के मसीहा, समाज के लिए प्रेरणा

राम अशीष यादव का यह प्रयास साबित करता है कि इंसानियत की कोई सरहद नहीं होती। थाइलैंड में रहते हुए भी वे अपने गांव की हर पुकार सुनते हैं और बिना किसी स्वार्थ के मदद का हाथ बढ़ाते हैं। उनकी यह सेवा भावना और उदारता उन्हें सचमुच ‘गरीबों का मसीहा’ बनाती है।

भगवान ऐसे महान दाता को और अधिक शक्ति दें, ताकि समाज में इंसानियत का यह दीपक और प्रज्वलित हो सके।