NH-53 पर मौत बनकर दौड़ा डम्पर: काग़ज़ ख़त्म, नंबर प्लेट तार से बंधी… और दो जिंदगियाँ उजड़ गईं!

NH-53 पर मौत बनकर दौड़ा डम्पर: काग़ज़ ख़त्म, नंबर प्लेट तार से बंधी… और दो जिंदगियाँ उजड़ गईं!

— मोरा तिन रास्ता पर दर्दनाक हादसा; साहिल की मौत, शरीफ गंभीर, ड्राइवर वाहन छोड़कर फरार —


  • आर.वी.9 न्यूज़ | संवाददाता, मनोज कुमार सिंह, रजनीश कुमार चंद्रवंशी

“कौन जिम्मेदार? सड़क पर बेकाबू सरकारी बोर्ड वाला डम्पर… और एक परिवार चिराग खो बैठा”

सूरत का एनएच-53… जहां रोज़ाना हजारो वाहन गुजरते हैं, जहां सुरक्षा के नाम पर चेकिंग अभियान के दावे किए जाते हैं, और जहां कागज़ ख़त्म व नंबर प्लेट तार से बंधी गाड़ियाँ भी बेखौफ सरपट दौड़ती नजर आती हैं। इन्हीं दावों के बीच बुधवार की रात एक ऐसा हादसा हुआ जिसने दिल को दहला दिया। एक तेज रफ्तार डम्पर, बेपरवाह ड्राइवर और दो साधारण मेहनतकश लोग—और पलभर में जिंदगी मौत में बदल गई। यह खबर सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की सुस्ती, लापरवाही और जांच के नाम पर चल रहे खोखले दावों पर एक बड़ा सवाल है।


हादसा कैसे हुआ — घटनास्थल की सटीक जानकारी 

साहिल (24) पुत्र फिरोज और शरीफ (58) पुत्र रज्जाक, निवासी उनपाटिया, थाना सचिन सूरत—मोरा थाना इच्छापोर में अपनी दुकान चलाते थे। बुधवार रात की तरह, रोज़ाना की तरह, ठीक लगभग 9 बजे दोनों अपनी स्कूटी (नंबर GJ05EZ9689) से दुकान बंद कर घर लौट रहे थे। पर किसे पता था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा। जैसे ही स्कूटी मोरा तिन रास्ता आगे, दमका पाटिया के सामने पहुंची— हजीरा की तरफ से बेकाबू रफ्तार में दौड़ता डम्पर (नंबर GJ33T8500)  सीधी टक्कर मारता हुआ आया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों दूर जा गिरे…और डम्पर ने स्कूटी को करीब 100 मीटर तक घसीटकर आगे ले गया। राहगीरों द्वारा सूचना दी गई और तुरंत 108 एम्बुलेंस मौके पर पहुंची। दोनों को सिविल हॉस्पिटल भेजा गया, लेकिन रास्ते में ही साहिल ने दम तोड़ दिया। शरीफ का इलाज जारी है। परिवार की पीड़ा शब्दों में बयान नहीं की जा सकती— जिंदगियां खत्म हो गईं, पर सवाल अभी भी जिंदा हैं।


डम्पर की हकीकत: पेपर खत्म… नंबर प्लेट तार से बंधी… सरकारी बोर्ड आगे टंगा!

घटनास्थल पर जब लोगों ने डम्पर की स्थिति देखी तो दंग रह गए। एम-परिवहन ऐप पर वाहन स्टेटस चेक किया गया— सभी पेपर खत्म! इंश्योरेंस? फिटनेस? टैक्स?—सब खत्म। सबसे चौंकाने वाली बात— डम्पर की आगे की नंबर प्लेट तार से बंधी हुई थी, मानो किसी भी पल गिर पड़ेगी। और उसके ठीक आगे लगा था एक बड़ा आसमानी नीला बोर्ड, जिसपर अंग्रेजी में लिखा था:  “SURAT MUNICIPAL CORPORATION, NORTH ZONE – KATARGAM, C & D WASTE COLLECTION VEHICLE, Toll Free: 1800 212 2829”

हिंदी की करे तो लिखा था — “सूरत नगर निगम, उत्तरी जोन, कतरगाम क्षेत्र, सी एंड डी अपशिष्ट संग्रहण वाहन” यानी यह वही वाहन है जो नगर निगम के कचरा संग्रहण का दावा करता है— लेकिन सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रहा था। और सवाल… कचरा ले जाने वाले वाहन का खुद का कागज कचरे में क्यों पड़ा है?


ड्राइवर फरार, डम्पर मिला बीपीसीएल पंप के सामने छोड़कर

हादसे के बाद ड्राइवर डम्पर से स्कूटी को लगभग 100 मीटर घसीटकर लेकर भागा और बीपीसीएल पेट्रोल पंप के सामने छोड़कर फरार हो गया। न तो घायल देखा, न पुलिस का इंतजार— बस डम्पर छोड़ भागता बना। इसी बीच मौके पर पहुँचे साहिल के मामा के लड़के जामीर भाई ने बताया: “दोनों को गंभीर चोटें आई थीं… साहिल रास्ते में ही चला गया।”


सवालों के घेरे में सिस्टम — जिम्मेदार कौन?

इतना बड़ा हादसा… कागज़ खत्म वाहन… नंबर प्लेट तार से लटकी…आगे सरकारी बोर्ड लगा हुआ…फिर भी…
  

·       RTO ने कभी गौर नहीं किया?

·        ट्रैफिक पुलिस की रोज़ की चेकिंग में यह गाड़ी कैसे बचती रही?

·        क्यों इस वाहन की फिटनेस व दस्तावेज समय रहते नवीनीकृत नहीं किए गए?

·        क्या सरकारी बोर्ड लगी गाड़ियों को देखकर आंखें मूंद ली जाती हैं?

राष्ट्रीय राजमार्ग 53 पर दौड़ता यह डम्पर… सिस्टम की लापरवाही और लोगों की जान के साथ खिलवाड़ का सबसे जीवंत उदाहरण बन गया है।


क्या हम सिर्फ हादसे गिनने के लिए बने हैं?

साहिल अब इस दुनिया में नहीं है। शरीफ अस्पताल में हैं। उनका परिवार टूट गया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल— क्या अगला शिकार कौन होगा, इसका इंतजार करना ही सिस्टम की मजबूरी है?

   आर.वी. नाइन न्यूज़ का उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था या सरकारी विभाग की छवि को ठेस पहुंचाना नहीं— बल्कि सच्चाई को समाज और शासन के सामने लाना है, ताकि अगली जान बच सके।

सड़कें सुरक्षित हों, वाहन नियम के दायरे में हों और जिम्मेदारों की जिम्मेदारी तय हो— यही इस रिपोर्ट का असली मकसद है।