बिहार में सियासी महायुद्ध अपने चरम पर — मोदी-शाह की हुंकार से लेकर प्रियंका-खरगे की रणनीति तक, चुनावी रणभूमि में गूंजा नेताओं का जनसैलाब
बिहार विधानसभा चुनाव का माहौल अब पूरी तरह सियासी ज्वालामुखी में बदल चुका है। पहले चरण की वोटिंग से ठीक पहले सोमवार को राज्य की राजनीति अपने चरम उफान पर पहुंची, जब देश के लगभग सभी बड़े नेता — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी वाड्रा और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता — एक साथ बिहार की धरती पर उतरे। कहीं मोदी की गूंज थी, तो कहीं प्रियंका की अपील… कहीं अमित शाह की रणनीतिक गर्जना, तो कहीं खरगे का सीधा हमला। पूरा बिहार सोमवार को मानो लोकतंत्र का रणक्षेत्र बन गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सहरसा और कटिहार में विशाल जनसभाएं कीं, जहां उन्होंने एनडीए सरकार के विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए विपक्ष पर तीखा प्रहार किया। मोदी ने कहा — “बिहार की जनता विकास चाहती है, परिवारवाद नहीं। अब समय है स्थिर सरकार को आगे बढ़ाने का।” आज मंगलवार को पीएम मोदी ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत — महिला संवाद’ कार्यक्रम के तहत एनडीए की महिला कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे, जिससे महिलाओं में एनडीए की पकड़ और मजबूत करने की कोशिश होगी। उधर, गृह मंत्री अमित शाह ने सीतामढ़ी, मधुबनी और शिवहर में लगातार जनसभाएं कीं। उन्होंने अपने भाषणों में विपक्ष को निशाने पर लेते हुए कहा —
“बिहार में अब अपराध और भ्रष्टाचार की राजनीति नहीं चलेगी, विकास और सुरक्षा की राजनीति चलेगी।”
वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी बिहार के चार जिलों में जनसभाओं के ज़रिए हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के मुद्दे पर एनडीए के लिए माहौल बनाया।
विपक्ष की रणनीति और कांग्रेस का पलटवार:
चुनाव प्रचार में कांग्रेस भी पूरे तेवर में नज़र आई। मल्लिकार्जुन खरगे ने वैशाली में अपनी पहली चुनावी रैली में कहा —
“बिहार का भविष्य बेरोजगारी, महंगाई और असमानता से नहीं बन सकता, बदलाव की ज़रूरत है।”
उन्होंने पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एनडीए पर तीखे सवाल दागे और जनता से “नई सोच, नई सरकार” का आह्वान किया। वहीं प्रियंका गांधी वाड्रा ने अपने जोशीले अंदाज़ में जनता को संबोधित करते हुए कहा —
“बिहार के लोग बदलाव चाहते हैं, अब वो बदलाव कांग्रेस लेकर आएगी।”
दूसरी ओर, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार शाम से तीन दिवसीय बिहार दौरे की शुरुआत की। वह एनडीए प्रत्याशियों के समर्थन में 12 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार करेंगी, जिससे महिला मतदाताओं में नई ऊर्जा लाने की कोशिश की जा रही है।
बिहार विधानसभा की कुल 243 सीटों पर दो चरणों में मतदान होना है —पहला चरण 6 नवंबर को और दूसरा चरण 11 नवंबर को। वहीं मतगणना 14 नवंबर को होगी। मंगलवार को पहले चरण के प्रचार का आखिरी दिन है, और सभी दलों ने इसे जनसमर्थन की अंतिम जंग के रूप में देखा है। सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक हर तरफ़ सिर्फ़ एक ही सवाल गूंज रहा है — “बिहार की सत्ता की डगर इस बार किसके हाथ जाएगी?”
बिहार की धरती पर इन दिनों राजनीति नहीं, बल्कि लोकतंत्र का महापर्व मनाया जा रहा है। एक तरफ़ मोदी-शाह की विकास और स्थिरता की हुंकार, दूसरी तरफ़ प्रियंका-खरगे का परिवर्तन का संकल्प — जनता के मन में द्वंद्व भी है और उम्मीद भी। अब सबकी नज़रें 6 और 11 नवंबर पर हैं, जब बिहार की जनता मतदान के ज़रिए तय करेगी — किसकी बातों में सच्चाई है और किसके वादों में दम।
बिहार का मौसम चाहे जैसा हो, लेकिन सियासी तापमान अब उबाल पर है। मंचों से निकल रही आवाज़ें ही अब आने वाले नतीजों की दिशा तय करेंगी।






