आज़मगढ़ में एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई! ₹50,000 का इनामी बदमाश वाकिफ मुठभेड़ में ढेर
- 44 मुकदमों वाला खूंखार अपराधी — गो-तस्करी, हत्या, लूट और चोरी में था वांछित | एसटीएफ डिप्टी एसपी डी.के. शाही के नेतृत्व में हुई सफल कार्रवाई
आर.वी.9 न्यूज़ |क्राइम रिपोर्टर, नरसिंह यादव
आज़मगढ़।
थाना रौनापार क्षेत्र का जोकहरा गांव शुक्रवार की देर रात गोलियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। यह कोई फिल्मी मुठभेड़ नहीं थी, बल्कि एसटीएफ मुख्यालय लखनऊ के निर्देशन में डिप्टी एसपी डी.के. शाही के नेतृत्व में चलाया गया एक बड़ा ऑपरेशन था, जिसमें ₹50,000 के इनामिया शातिर अपराधी वाकिब उर्फ वाकिफ पुत्र कलाम उर्फ सलाम, निवासी नियाउज, थाना फूलपुर (जनपद आज़मगढ़) को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया। यह वही वाकिफ था, जिस पर गो-तस्करी, हत्या, लूट, चोरी और अवैध हथियारों की तस्करी जैसे 44 से अधिक गंभीर अपराधों में मुकदमे दर्ज थे। आज़मगढ़, गोरखपुर, कुशीनगर, जौनपुर और संतकबीर नगर जिलों में फैले उसके अपराधों की लकीरें पुलिस रिकॉर्ड में लंबी फेहरिस्त के रूप में दर्ज हैं।
कैसे हुई मुठभेड़ – जोकहरा पुल बना रणक्षेत्र
दिनांक 07 नवम्बर 2025 की रात। थाना सिधारी क्षेत्र में हुई एक छिनैती की घटना की जाँच में जुटी स्वाट टीम और थाना सिधारी पुलिस को एसटीएफ से सूचना मिली कि कुछ कुख्यात अपराधी फरार होकर थाना रौनापार क्षेत्र की ओर भाग रहे हैं। सूचना मिलते ही एसटीएफ, स्वाट टीम और थाना सिधारी पुलिस ने संयुक्त रूप से जोकहरा पुल के पास घेराबंदी की। जैसे ही बदमाशों ने पुलिस को देखा, उन्होंने जान से मारने की नीयत से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी आत्मरक्षा में फायरिंग की, और कुछ ही पलों में जोकहरा पुल गोलियों की आवाज़ों से दहल उठा। जब धुआँ छँटा — एक बदमाश गंभीर रूप से घायल पड़ा मिला, जबकि तीन अन्य बदमाश अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। घायल को तत्काल सीएचसी हरैया भेजा गया, जहाँ हालत नाजुक होने पर डॉक्टरों ने सदर अस्पताल, आज़मगढ़ रेफर कर दिया। उपचार के दौरान डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मारे गए बदमाश की पहचान — ₹50,000 का इनामिया शातिर अपराधी
मृत बदमाश की पहचान वाकिब उर्फ वाकिफ पुत्र कलाम उर्फ सलाम, उम्र लगभग 27 वर्ष, निवासी नियाउज, थाना फूलपुर, जनपद आज़मगढ़ के रूप में हुई। यह बदमाश एसटीएफ की वांछित सूची में टॉप अपराधियों में से एक था। उसके खिलाफ हत्या, लूट, चोरी, धोखाधड़ी, गौ-हत्या और गौ-तस्करी जैसे संगीन अपराधों में लगभग 44 मुकदमे दर्ज थे। वह न केवल आज़मगढ़ बल्कि गोरखपुर, कुशीनगर, संतकबीर नगर और जौनपुर जिलों में सक्रिय अपराधी गिरोह का सरगना था।
बरामदगी और पुलिस का बयान
मुठभेड़ स्थल से पुलिस को 12 बोर बंदूक, एक रिवॉल्वर, एक तमंचा, चाकू और भारी मात्रा में जिंदा कारतूस मिले हैं। साथ ही पुलिस ने गौवंश से भरी एक पिकअप गाड़ी भी बरामद की है, जिसे अपराधी अवैध तस्करी के लिए ले जा रहे थे।
एसटीएफ उपाधीक्षक डी.के. शाही ने बताया —
“एसटीएफ मुख्यालय की टीम लंबे समय से वाकिफ की तलाश में थी। उसके खिलाफ कई जनपदों में गंभीर मुकदमे दर्ज थे। आज की कार्रवाई पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया और सटीक सूचना पर आधारित रही। फरार साथियों की तलाश के लिए कॉम्बिंग ऑपरेशन जारी है।”
वहीं अपर पुलिस अधीक्षक नगर मधुबन कुमार सिंह ने कहा —

“क्षेत्र में कानून-व्यवस्था पूर्णतः सामान्य है। फरार अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। पुलिस का अभियान अपराधियों के विरुद्ध जारी रहेगा।”
कॉम्बिंग ऑपरेशन और खौफ का माहौल
मुठभेड़ के बाद पूरी रात पुलिस की कई टीमें जोकहरा और आसपास के गाँवों में कॉम्बिंग ऑपरेशन करती रहीं। स्थानीय लोगों ने बताया कि देर रात गोलियों की आवाज़ें सुनते ही पूरा इलाका सहम गया था, लेकिन सुबह जब सच सामने आया, तो लोगों ने राहत की साँस ली। अब गाँवों में चर्चा का विषय यही है कि “एसटीएफ ने आखिरकार वाकिफ का आतंक खत्म कर दिया।”
अपराध का अंत निश्चित है
आज़मगढ़ की इस मुठभेड़ ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि —
“कानून से बड़ा कोई नहीं… और अपराध का रास्ता चाहे कितना भी लंबा क्यों न हो, उसका अंत हमेशा एक जैसा होता है — मौत या जेल।”
एसटीएफ की इस साहसिक कार्रवाई ने प्रदेश में अपराधियों के हौसले पस्त कर दिए हैं। और जनता के मन में यह संदेश साफ़ है — “उत्तर प्रदेश में अपराध नहीं, कानून की ही चलेगी।”






