जल संरक्षण की क्रांति: ‘अमृत सरोवर मिशन’ ने रचा नया इतिहास, तय लक्ष्य से आगे बढ़कर बनाए 68 हज़ार से अधिक सरोवर

जल संरक्षण की क्रांति: ‘अमृत सरोवर मिशन’ ने रचा नया इतिहास, तय लक्ष्य से आगे बढ़कर बनाए 68 हज़ार से अधिक सरोवर

नई दिल्ली, 11 अगस्त 2025 — जल संकट से जूझते भारत के गांवों में अब पानी की बूंद-बूंद तराशने वाली एक अनोखी पहल ने जीवन में नई उम्मीद जगा दी है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 24 अप्रैल 2022 को शुरू किया गया ‘मिशन अमृत सरोवर’ अब सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि जनभागीदारी से चलने वाला एक जन-आंदोलन बन चुका है।

मिशन का लक्ष्य था— देश के प्रत्येक ग्रामीण जिले में 75 सरोवरों का निर्माण या पुनरुद्धार कर 15 अगस्त 2023 तक 50,000 जलाशयों का निर्माण पूरा करना। लेकिन इस लक्ष्य को पार करते हुए अक्टूबर 2024 तक 68,827 सरोवर तैयार किए जा चुके हैं।


जल बचाने से जीवन बचाने तक

इन सरोवरों ने सिर्फ पानी जमा करने का काम नहीं किया, बल्कि सूखते तालाबों में नई जान फूंक दी। मिशन ने सतही और भूजल दोनों की उपलब्धता बढ़ाई, जिससे खेती, पशुपालन और ग्रामीण जीवन को स्थायी सहारा मिला। आईआईटी-दिल्ली के अध्ययन के मुताबिक, मिशन के बाद देश में जल निकायों के सतह क्षेत्र में 16.3% की वृद्धि और सूखे जलाशयों में 42% की कमी दर्ज हुई।


हर सरोवर के साथ हरियाली का वादा

मिशन के तहत हर सरोवर स्थल पर नीम, पीपल, बरगद जैसे देशी पेड़ों का पौधारोपण अनिवार्य किया गया है। अब तक लगभग 23 लाख पौधे इन जलाशयों की गोद में हरियाली का आंचल फैला चुके हैं।


जनभागीदारी की मिसाल

इस मिशन में स्वतंत्रता सेनानी, शहीद परिवार, पद्म पुरस्कार विजेता और ग्राम पंचायतों के वरिष्ठ नागरिकों ने नेतृत्व किया। अब तक—

  • 2,203 स्वतंत्रता सेनानी

  • 22,993 पंचायत के वरिष्ठ सदस्य

  • 742 शहीद परिवार
    इस ऐतिहासिक प्रयास में भाग ले चुके हैं।


सबसे आगे उत्तर प्रदेश

निर्मित/पुनरुद्धार किए गए सरोवरों में उत्तर प्रदेश ने सबसे आगे रहते हुए 16,632 अमृत सरोवर बनाकर रिकॉर्ड कायम किया। इसके बाद मध्य प्रदेश (5,825) और कर्नाटक (4,054) का स्थान रहा।


मिशन अमृत सरोवर यह साबित करता है कि जब सरकार, समाज और स्थानीय लोग एक साथ कदम बढ़ाते हैं, तो सूखी धरती पर भी जल और जीवन की लहर दौड़ सकती है। यह केवल तालाब नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी का खजाना है।