गोरखपुर में दलित नवयुवती की संदिग्ध मौत से मचा हड़कंप – स्व. मदन सिंह मेमोरियल अस्पताल के डॉक्टर पर परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप

क्राइम रिपोर्टर, गोरखपुर (उत्तर प्रदेश)
गोरखपुर जिले के गोला थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत लाही दाढ़ी, जानीपुर की एक दलित नवयुवती बबली (उम्र लगभग 18-20 वर्ष) की मौत ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। पीड़िता की मौत बुधवार सुबह स्व. मदन सिंह मेमोरियल अस्पताल, जानीपुर में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों की लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण उनकी बेटी की जान चली गई।
दर्द से तड़पती रही युवती, परिजनों की गुहार अनसुनी
जानकारी के अनुसार, बबली को अचानक पेट दर्द की शिकायत हुई थी। परेशान परिवारजन उसे नजदीकी जानीपुर चौराहे स्थित स्व. मदन सिंह मेमोरियल हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। सुबह लगभग चार बजे उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिजनों का कहना है कि लगातार डॉक्टर से सही इलाज की गुहार करने के बावजूद उन्हें केवल झिड़कियां और बहलावे मिले।
परिजनों ने बताया –
"हम बार-बार डॉक्टर से कह रहे थे कि अगर बीमारी समझ में आ रही हो तो इलाज कीजिए, वरना बता दीजिए। लेकिन डॉक्टर हम लोगों को डांटकर चुप करा रहे थे। कह रहे थे कि लड़की नखरे कर रही है, घबराओ मत, दवा दे दी है, अभी ठीक हो जाएगी।"
हालत बिगड़ने पर भी नहीं मिली मदद
परिवारजन का आरोप है कि जब युवती की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई और उन्होंने डॉक्टर को बुलाया तो आनन-फानन में कहा गया कि उसे तुरंत गोरखपुर रेफर करना पड़ेगा। लेकिन परिजनों का कहना है कि तब तक युवती की मौत हो चुकी थी।
पीड़िता के भाई ने बताया –
"डॉक्टर ने कहा कि इसे करैत सांप ने काटा है, और हमसे पूछा कि आपने पहले क्यों नहीं बताया? जबकि हमें कुछ भी समझ में नहीं आया। सच तो यह है कि उनकी लापरवाही के चलते ही हमारी बहन ने दम तोड़ा।"
एम्बुलेंस से शव घर पहुंचाया गया
आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने मृतका को जीवित दिखाने का बहाना बनाते हुए गोरखपुर रेफर किया, लेकिन रास्ते में ही एम्बुलेंस द्वारा सीधे शव को घर पहुंचा दिया गया।
पुलिस ने शव कब्जे में लेकर भेजा पोस्टमार्टम
घटना की सूचना पर गोला थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए गोरखपुर भेज दिया। इस पूरे मामले ने ग्रामीणों और आसपास के क्षेत्र में आक्रोश फैला दिया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या गरीब और दलित परिवार की बेटी होने के कारण उसे गंभीरता से नहीं लिया गया?
जांच की मांग तेज
ग्रामीणों और पीड़ित परिवार ने प्रशासन से घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अस्पताल प्रशासन ने पूरे मामले को दबाने और जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया।
सवालों के घेरे में अस्पताल
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क्या युवती की मौत डॉक्टर की लापरवाही से हुई?
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क्या उसे सही समय पर उचित इलाज मिला?
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करैत सांप के काटने की बात सच्चाई है या इलाज में चूक छिपाने का बहाना?
समाज में गहराया अविश्वास
इस घटना ने स्थानीय लोगों में निजी अस्पतालों के प्रति गहरा अविश्वास पैदा कर दिया है। लोग कह रहे हैं कि जब डॉक्टर ही भरोसे को तोड़ेंगे तो गरीब जनता कहाँ जाएगी?
यह मामला सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े करता है। प्रशासन अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाता तो ऐसे हादसे दोबारा भी हो सकते हैं।