अमृत सरोवर मिशन: गांव-गांव में जल का अमृत, पर्यावरण का संबल

अमृत सरोवर मिशन: गांव-गांव में जल का अमृत, पर्यावरण का संबल

देश के हर कोने में जल संरक्षण की नई गाथा लिखने वाला मिशन अमृत सरोवर अब अपने सुनहरे पड़ाव पर है। 24 अप्रैल 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य था—हर ग्रामीण जिले में 75 सरोवरों का निर्माण या पुनरुद्धार, ताकि जल संकट के बादल छंटें और गांवों में स्थायी जल स्रोत पनपें।

लक्ष्य से भी आगे
15 अगस्त 2023 तक 50,000 सरोवरों का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन सरकार और जनता के संयुक्त प्रयासों से अक्टूबर 2024 तक 68,827 सरोवर बन या संवर चुके हैं। उत्तर प्रदेश ने सबसे आगे रहते हुए 16,632 अमृत सरोवरों का निर्माण कर एक मिसाल कायम की है।

पानी ही नहीं, उम्मीद का स्रोत
इन सरोवरों ने न केवल गांवों की तात्कालिक जल जरूरतें पूरी की हैं, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए भूजल स्तर और सतही जल स्रोत सुरक्षित किए हैं। IIT दिल्ली के अध्ययन के मुताबिक, इनसे जल निकायों का सतही क्षेत्र 16.3% बढ़ा और सूखे पड़े जल स्रोत 42% कम हुए।

हरियाली का वचन
मिशन के अंतर्गत हर सरोवर स्थल पर नीम, पीपल, बरगद जैसे देशी पेड़ों का रोपण अनिवार्य किया गया है। अब तक 23 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं, जो इन जलाशयों को हरियाली की छांव और पर्यावरण को नई सांस देंगे।

जनभागीदारी की शक्ति
इस मिशन में गांव-गांव के लोग, स्वतंत्रता सेनानी, शहीदों के परिवार, वरिष्ठ नागरिक और पद्म पुरस्कार विजेता जुड़कर इसे एक राष्ट्रीय जनआंदोलन का रूप दे चुके हैं। 2,203 स्वतंत्रता सेनानियों और 742 शहीद परिवारों ने इसमें सहभागिता कर इसे भावनात्मक और सामाजिक गहराई दी है।

परिणाम जो बदल रहे हैं तस्वीर
GIZ इंडिया के आकलन में पाया गया कि अमृत सरोवर ने न केवल कृषि उत्पादन बढ़ाया, बल्कि जैव विविधता और गांव की आजीविका में भी सुधार किया।

राज्यवार उपलब्धियां
जहां एक ओर मध्य प्रदेश (5,825), कर्नाटक (4,054) और राजस्थान (3,139) जैसे राज्यों ने उल्लेखनीय संख्या में सरोवर बनाए, वहीं असम, महाराष्ट्र और बिहार ने भी जल संरक्षण के इस महायज्ञ में महत्वपूर्ण योगदान दिया। मिशन अमृत सरोवर सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि जल, जमीन और जीवन के बीच तालमेल की कहानी है। यह वह संकल्प है जिसमें मिट्टी की खुशबू, पानी की मिठास और हरियाली की ठंडक—सब एक साथ समाई हुई है।